भुलक्कड़ भोलानाथ के किस्से Funny Kahani
भोलानाथ हद दर्जे के भुलक्कड़ थे। उनकी इस आदत से उनकी धर्मपत्नी ही नहीं, घर का नौकर भी परेशान था। उनकी यह आदत जग जाहिर थी और उनके भुलक्कड़पन के कई किस्से प्रचलित थे। कॉलेज का स्टाफ़ तथा विद्यार्थी उनकी इस आदत पर आये दिन चुटकियाँ लेने से न चूकते। एक दिन भोलानाथ भुलक्कड़पन पर कक्षा में कुछ बोल रहे थे। उन्होंने कहा, “एक विद्वान का कथन है कि प्रोफ़ेसरों को भुलक्कड़ कहने वाले स्वयं मूर्ख हैं।'' “क्या नाम है इन विद्ठान का सर?”' एक विद्यार्थी ने उत्सुकतावश पूछा, तो प्रोफेसर भोलानाथ सिर खुजलाते हुए बोले, '' क्या भला-सा नाम है पर मैं इस समय भूल रहा हूँ।'! यह सुनकर बच्चे ठठाकर हँस पड़े और प्रोफेसर बगलें झाँकने लगे। भोलानाथ अपने हाव- भाव से पक्के दार्शनिक लगते थे। वह हमेशा विचारों में खोये रहते थे। एक दिन इस उधेड़-बुन में वह घर पहुँचे। संध्या का समय था। सड़क पर हल्का अंधेरा था। आते ही वह घर का दरवाज़ा खटखटाने लगे। ऊपर से नौकर ने उनकी ओर देखा, पर अंधेरे में उन्हें पहचान न सका। उन्हें दूसरा कोई आदमी समझकर उसने कहा, '' प्रोफ़ेसर साहेब घर पर नहीं हैं।'! “अच्छा ठीक ह...